भगवान कृष्ण (निबंध) Lord Krishna
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादो मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को हुआ था। वह हिन्दू धर्म के चौबीस अवतारों में से एक है। कृष्ण जी का अवतार अर्थात प्रकटीकरण दिवस हिन्दी कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष के अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। उनका जन्म मथुरा की जेल में हुआ था। उनके पिता का नाम वसुदेव और माता का नाम देवकी था।
उनकी पत्नी का नाम रुक्मणि और पुत्र का नाम प्रदुम्न था। वह अपनी शिक्षा दीक्षा के लिए अपने गुरु संदीपनी मुनि के यहां उज्जैन गए । वहां उन्होंने अनेकों प्रकार की विद्या ज्ञान कला कौशल की पर्याप्त शिक्षा अर्जित किया ।
भगवान श्री कृष्ण जी ने धर्म के स्थापना और उत्थान का कार्य किया। साधु संत देवता के हित का काम किया ।
उन्होंने समाज के सभी वर्ग के लोगों का भला किया । वे पशु पक्षियों से भी अनन्य लगाव रखते थे।
भगवान श्री कृष्ण मोर का पंख अपने मस्तक पर धारण करते थे। वे गाय के परम भक्त और सेवक थे। वे गायो को खिलाते और चराते थे।
कृष्ण जी समाज सेवा करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे । छोटा से छोटा सेवा का मौका भी नहीं चूकते थे । उनको लोग कन्हैया कान्हा गोपाल नन्दलाल आदि अनेकों नाम से पुकारते थे।
कृष्ण जी सत्य न्याय एवम् कर्तव्य पथ के समर्थक और प्रवर्तक थे । दुर्योधन के अत्याचार से पीड़ित एवम् परेशान पांडवो का उन्होंने साथ दिया। पांडवो को उन्होंने विजय दिलाया । उन्होंने अनेकों लोगो का कष्ट दूर किया । उनके कृत्यों का शब्दों में वर्णन सम्भव नहीं है।
भगवान श्रीकृष्ण ने अनेकों लीलाएं और चमत्कार अपने जीवन में जगत और मानव कल्याण के लिए किए हैं। उन्होंने मथुरा के राजा कंस को कई बार चेतावनी दिया परन्तु वह नहीं माना और अनैतिक रास्ते पर चलता रहा ।
कृष्ण जी ने अपने बड़े भाई बलराम जी की मदद से उसका वध कर दिया।

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