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मंगल पाण्डेय जीवन परिचय Mangal Pandey Biography

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  मंगल पाण्डेय महान देशभक्त और भारत माता के  वीर सपूत थे । उनका जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा ग्राम में हुआ था। उनके पिता जी का नाम दिवाकर पांडेय और माता जी का नाम अभयरानी पांडेय था। मंगल पाण्डेय जी सन् 1849 में 22 साल की उम्र में ईस्ट इंडिया कंपनी के सेना के 34 वीं बटालियन में भर्ती हुए। गाय की चर्बी से बने कारतूस अर्थात बंदूक की गोली को मुंह से खोलने से उन्होंने माना कर दिया । इस तरह उन्होंने केवल सन् 1849 से सन् 1857 तक नौकरी करने के पश्चात बगावत कर दिया।  वह बहुत ही साहसी पराक्रमी एवम् शूरवीर थे । उनके ऐसा करने से बौखलाए अंग्रेज़ो ने लगभग 34000 कानून बनाया जो भारतीयों पर लागू हुआ । अंग्रेजो ने भविष्य में और किसी प्रकार की बगावत को रोकने के लिए ऐसा किया। भारत सरकार ने सन् 1984 में मंगल पाण्डेय जी के नाम पर एक डाक टिकट जारी किया था। मंगल पाण्डेय जी को बराकपुर कैंटोंटमेंट में 8 अप्रैल 1857 को अंग्रेजो के द्वारा फांसी की सजा दी गई । इस प्रकार उन्होंने हंसते हंसते अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उनको शत शत नमन ।

मदन मोहन मालवीय (जीवन परिचय)

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  मदन मोहन मालवीय जी को लोग बहुत ही आदर और सम्मान के साथ महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी कहते थे। वह सचे देशभक्त थे और जीवन में प्रत्येक पल वह देश और समाज के हित के लिए तत्पर रहते थे। मालवीय जी का जन्म 25 दिसंबर 1861 को भारत देश के उत्तरप्रदेश राज्य के प्रयागराज जिले में हुआ था। मदन मोहन मालवीय जी के पिता का नाम पण्डित बृजनाथ और माता जी का नाम मोना देवी था।  प्रयाग विश्विद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने के बाद वह कोलकाता विश्वविद्यालय में अध्ययन करने गए  और  वहां से स्नातक की उपाधि ग्रहण किया। वह सत्यनिष्ठ व्यक्ति कवि समाज सुधारक पत्रकार वकील और स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी थे। वह अत्यधिक व्यवहार कुशल एवम् मृदुभाषी थे । उन्होंने पूरे जीवन हिन्दू संस्कृति और सनातन धर्म की उन्नति के लिए प्रचार प्रसार किया। मदन मोहन मालवीय जी वनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के संस्थापक थे। वह बी एच यू के तीसरे कुलपति के रूप में भी कार्य किए। मदन मोहन मालवीय जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तीन बार अध्यक्ष बने। मदन मोहन मालवीय जी को महामना की उपाधि प्राप्त थी। भारत सरकार ने उनके राष्ट्र के प्रति सेवा...

रवीन्द्र नाथ टैगोर (जीवन परिचय)

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  रवीन्द्र नाथ टैगोर जी को लोग सम्मान से गुरुदेव केब नाम से संबोधित करते थे। उनका जन्म 7 मै 1861 को भारत देश के पश्चिम बंगाल राज्य में कोलकाता के ठाकुरबारी में हुआ था। रवीन्द्र नाथ टैगोर जी के पिता जी का नाम देवेन्द्र नाथ टैगोर तथा माता जी का नाम शारदा देवी था। उनके पत्नी का नाम मृणालिनी देवी था। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा सेंट जेवियर स्कूल से हुई थी। उच्च शिक्षा के लिए वह लंदन गए। वहां उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय से बैरिस्टर अर्थात वकालत की पढ़ाई किया। वह कवि साहित्यकार दार्शनिक एवम् सच्चे देशभक्त थे। उन्होंने भारतीय साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया था। वह पूरे एशिया महाद्वीप में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने अनेक किताबे भी लिखी थी। रविन्द्र नाथ टैगोर जी गीतांजलि कणिका तथा वीथिका के रचयिता हैं। भारत देश और बांग्ला देश दोनों के राष्ट्र गान के रचयिता गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर जी है। उनकी मृत्यु 7 अगस्त 1941 को ठाकुरबारी कोलकाता में हुई।

महाराणा प्रताप (जीवन परिचय)

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  महाराणा प्रताप जी अपने वीरता साहस शौर्य त्याग पराक्रम दृढ़ प्रण के लिए भारत ही नहीं अपितु पूरे संसार  में विख्यात है। महाराणा प्रताप जी का जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ के दुर्ग अर्थात किले में हुआ था।  उनके पिता जी का नाम महाराजा उदय सिंह द्वितीय था। उनके माता जी का नाम महारानी जयवंता बाई था। महाराणा प्रताप जी के गुरु जी का नाम राघवेन्द्र था। वह सनातन धर्म के समर्थक और अनुया महाराणा प्रताप जी का राज्याभिषेक 28 फरवरी 1572 को हुआ था। वह उदयपुर मेवाड़ के सिसौदिया राजवंश के प्रतापी राजा थे। उन्होंने सम्राट अकबर की अधीनता नहीं स्वीकार किया । उन्होंने अपनी सीमित सेना के साथ अकबर का सामना किया । हल्दीघाटी के युद्ध में उनको हार का सामना करना पड़ा। महाराणा प्रताप की की मृत्यु 19 जनवरी 1597 को चावंद में हुई। उनको शत शत नमन । जन्म                    9 मई 1540 मृत्यु                     19 जनवरी 1597 पिता                    उदयसिंह...

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन (जीवन परिचय) Dr Sarvapalli Radha Krishna Biography

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डॉ   सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्म 5 सितम्बर 1888 को भारत देश के तमिलनाडु राज्य के तिरुवल्लूर में हुआ था।  सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के पिता जी का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता जी का जन्म सर्वपल्ली सीताम्मा था। उनके पत्नी का नाम सिवकामू राधाकृष्णन था। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा तिरुवल्लूर से प्राप्त क़िया। उच्च स्तर की शिक्षा उन्होंने चेन्नई क्रिश्चियन कॉलेज से प्राप्त किया। सन् 1907 में उन्होंने कला संकाय से स्नातक की उपाधि प्राप्त किया। तत्पश्चात सन् 1909 में दर्शनशास्र विषय में परास्नातक अर्थात एम ए की उपाधि प्राप्त किया।  डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी महान शिक्षाविद् दार्शनिक और प्रखर हिन्दू विचारक थे। उन्होंने कई पुस्तक भी लिखी है। इंडियन फिलॉस्फी फिलॉस्फी आफ टैगोर रिलिजन साइंस एंड कल्चर आदि कुछ प्रमुख पुस्तके है। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्म दिवस को ही भारत देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। सभी शिक्षक उनके जीवन से प्रेरणा लेते है। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी भारत के प्रथम उप राष्ट्रपति थे। इस पद पर वह सन् 1952 से लेकर सन् 1962 तक रहे। वह भारत के दूसरे...

मदर टेरेसा (जीवन परिचय) Mother Teresa

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  मदर टेरेसा जी महान समाज सेवी थी। उनका पूरा नाम अगनेस गोंझा बोया जिजू था। वह एक रोमन कैथोलिक नन थी। उनका जन्म 26 अगस्त 1910 को सोपजे मैसिडोनिया में हुआ था।  मदर टेरेसा जी के पिता का नाम निकोला बोयाजू और माता जी का नाम द्राना बोयाजू था। मदर टेरेसा जी गरीब असहाय दलित पीड़ित अनाथ लोग के लिए साक्षात फरिश्ता के तरह थी।  मदर टेरेसा जी ने भारत की नागरिकता ग्रहण कर लिया था। मदर टेरेसा जी ने समाज के शोषित वर्ग के लोगों के लिए अनेक विद्यालय अस्पताल आदि  खुलवाए थे।  उन्होंने मानव सेवा के क्षेत्र में अपना अग्रणी स्थान बनाया। मदर टेरेसा जी ने सन् 1950 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी नामक संस्था की स्थापना किया। सन् 1997 तक यह संस्था 123 देशों में 610 मिशन के साथ कार्य करती थी। आज यह संस्था विश्व के लगभग 150 देशों में 1000 मिशन के कार्य कर रही है।  मदर टेरेसा जी को सन् 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। भारत सरकार ने उनकी अद्वितीय और अनुपम उत्कृष्ट मानव सेवा के कार्य के लिए उनको भारत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सन् 1980 में सम्मानित किया था। मदर टेरसा जी ...

चंद्रगुता मौर्य (निबंध)Chandragupta Maurya

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  चन्द्रगुप्त मौर्य एक  चक्रवर्ती सम्राट थे । उनका जन्म 345 ईसा पूर्व में हुआ था। उनका जन्म स्थान तत्कालीन पिपली वन जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के पास का क्षेत्र माना जाता है।  उनके पिता का नाम महाराज चंद्रवर्धन मौर्य तथा उनके माता का नाम महारानी माधुरा था । उनके पत्नी का नाम दुर्धरा था । बिन्दुसार उनका पुत्र और उत्तराधिकारी था । सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य जी मौर्य साम्राज्य के संस्थापक थे । उनके राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र वर्तमान में पटना के नाम से विख्यात है। चन्द्रगुप्त ने लगभग 24 वर्ष शासन किया उसके राज्य की सीमा बहुत ही विस्तृत थी । सम्पूर्ण पूर्वी भारत उत्तर भारत के साथ ही साथ उसका राज्य बलूचिस्तान मैसूर और सौराष्ट्र तक फैला हुआ था। चाणक्य जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है। वे चन्द्रगुप्त मौर्य के गुरु थे। सम्राट उनका अत्यधिक सम्मान एवम् आदर करते थे। शासन व्यवस्था का तरीका स्पष्ट रूप से गुरु चाणक्य की पुस्तक कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित पद्धति के अनुसार चलती थी। मेगस्थनीज ने चन्द्रगुप्त के राज में यूनानी राजदूत बनकर अपना बहुमूल्...

अशोक महान सम्राट (निबंध) Ashok The Great

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  महान सम्राट अशोक का पूरा नाम देवनांप्रिय अशोक था । उसका जन्म 304 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र पटना में हुआ था। अनेकों महान गुणों से युक्त सम्राट अशोक राजनीति एवम् कूटनीति के कौशल की पराकाष्ठा अर्थात चरमोत्कर्ष के तुल्य था । सम्राट अशोक के पिता का नाम बिन्दुसार तथा माता का नाम सुभद्रांगी था । उनको लोग रानी धर्मा के नाम से भी जानते थे । उनकी पत्नी का नाम देवी कारुकी था । सम्राट अशोक का शासन काल 269 ईसा पूर्व से लेकर 232 ईसा पूर्व तक जाना जाता है। अपने शासन काल में उन्होंने अनेकों महान निर्णय और कार्य किए ।  उनके राज्य की सीमाएं  आजतक की भारतवर्ष की सबसे बड़ी सीमा थी । जिसमे वर्तमान भारत पाकिस्तान अफगानिस्तान बांग्लादेश नेपाल भूटान म्यांमार के अधिकांश भाग शामिल था। उन्होंने 33 अभिलेख पत्थरो पर खुदवाए थे। जो अपना विशेष महत्व रखते थे। इन लेखों से उनके शासन व्यवस्था की जानकारी प्राप्त होती थी। प्रसिद्ध कलिंग के युद्ध में उन्होंने विजय प्राप्त किया था । जिसमे लगभग 1लाख लोग मारे गए थे। 1लाख पचास हजार लोग घायल हो गए थे। इतना ही नही लगभग 1लाख पचास हजार लोग निर्वासित किए गए थे। कलिंग ...

लाला लाजपत राय (निबंध) Lala lLajpat Roy

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लाला लाजपत राय उच्च कोटि के देश भक्त थे । उन्होंने अपने जीवन  काल में राष्ट्र एवम् आम जनमानस के लिए अनेक कार्य किया। देश भक्ति उनके रोम रोम मे भरी थी।   लाला लाजपत राय जी का जन्म 28 जनवरी 1965 को भारत देश के पंजाब राज्य के दुधिके नमक स्थान पर हुआ था।  लाला लाजपत राय जी के पिता जी का नाम राधा कृष्ण और माता जी का नाम गुलाब देवी था। प्यारेलाल अग्रवाल अमृत राय अग्रवाल और पार्वती अग्रवाल उन दोनों की संताने थी। लाला लाजपत राय जी को पंजाब केसरी नाम से जाना जाता था।  लाला लाजपत राय जी ने पंजाब नेशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कंपनी की स्थापना किया था। लाला लाजपत राय जी ने एक और ऐतिहासिक महत्व का कार्य हिन्दू महासभा की स्थापना के रूप में किया था। हिन्दू महासभा को बाद में राजनैतिक पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। लाला लाजपत राय जी ने अनेक पुस्तके भी लिखी है। जिनमे यंग इंडिया भारत का राजनैतिक भविष्य तथा शिवाजी एवम् श्री कृष्ण जी की जीवनी आदि है। लाला लाजपत राय जी हिन्दी के प्रचार प्रसार के समर्थक और अंग्रेज़ी के प्रबल विरोधी थे। डी ए वी स्कूल अर्थात दयानन्द एंग्लो वैदिक स्...

बाल गंगा धर तिलक (निबंध) लोकमान्य तिलक Bal Ganga Dhar Tilak

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  बाल गंगाधर तिलक सच्चे देशभक्त थे । उनके द्वारा आजादी की लड़ाई में किया गया योगदान अनुकरणीय है। वह देश के सच्चे वीर सपूत थे । जिन्होंने भारत माता के लिए तन मन धन अर्पण कर दिया ।  अंग्रेजो से आजादी प्राप्त करने हेतु एक वीर जागरूक राष्ट्र भक्त का उदाहरण पेश करते हुए उन्होंने तरह तरह के कष्ट उठाए ।  बाल गंगाधर तिलक जी का वास्तविक बचपन का नाम केशव गंगाधर तिलक था। उनको लोग लोकमान्य तिलक के नाम से भी पुकारते थे। बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को भारत देश के महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरि नमक स्थान पर हुआ था। बाल गंगाधर तिलक के पिता जी का नाम श्री गंगाधर तिलक था। उनके माता जी का नाम पार्वतीबाई गंगाधर था। उनके जीवन संगिनी अर्थात अर्धांगिनी का नाम सत्यभामा बाई तिलक था।श्री धर विश्वनाथ रामभाऊ बलवंत उनके पुत्र थे। बाल गंगाधर तिलक जी उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त विद्वान और वकील थे।वे गणित के अध्यापक भी थे। बाल गंगाधर तिलक ने दो समाचार पत्र का प्रकाशन भी किया । जिनके नाम मराठा और केसरी था। उन्होंने पुस्तके भी लिखी है जिनमे गीता रहस्य द ओरियन वेदों का आध्यात्म वेदांग और ज्योतिष आ...

सुभाष चन्द्र बोस (निबंध) Subhash Chandra Bose

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  सुभाष चन्द्र बोस जी एक महान देशभक्त और क्रांतिकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने देश और हम सब की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उनको सम्मान के साथ लोग नेताजी कहकर पुकारते थे। सुभाष चन्द्र बोस जी का जन्म 23 जनवरी 1897 को भारत देश के उड़ीसा राज्य के कटक नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता जी का नाम जानकी नाथ बोस था और उनकी माता जी का नाम प्रभावती था। उनके पिता जी पेशे से वकील थे । उनके बड़े भाई का नाम शरत चन्द्र बोस था। प्रारंभिक शिक्षा और दीक्षा कटक से प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से प्राप्त किया। तत्पश्चात कैंब्रिज विश्वविद्यालय से उन्होंने मानसिक विज्ञान से स्नातक की डिग्री हासिल किया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में उन्होंने अतुलनीय और उल्लेखनीय कार्य किया।उन्होंने जापान के सहयोग से आजाद हिंदू फौज बनाया । उनका नारा था  तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा। वह स्वतंत्रता सेनानियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय भी थे। उनका नेतृत्व सब लोग पसन्द करते थे। सुभाष चन्द्र बोस जी ने ही सर्वप्रथम 6 जुलाई 1944 को अपने संबोधन में ...

चाणक्य या कौटिल्य या विष्णुगुप्त (निबंध) Chankya or Kautilya or Vishnugupt

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  चाणक्य महान सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य का गुरु था । उन्हें कौटिल्य तथा विष्णुगुप्त नाम से भी जाना जाता है। चाणक्य का जन्म 376 ईसा पूर्व में हुआ था। उनका जन्म स्थान विक्रमसीला है ।  चाणक्य जैन सनातन धर्म के अनुयाई थे। उनके पिता का नाम चणक था। प्रत्येक विषय पर उनका स्पष्ट मत था । वे कुशल वक्ता विद्वान और सच्चे गुरु थे । चाणक्य अदभुत विलक्षण अनेकानेक प्रतिभा के धनी थे। वे लेखक दार्शनिक अर्थशास्त्री शिक्षक और राजनीति में पूर्णतया निपुण थे ।  चाणक्य ने शासन व्यवस्था चलाने के लिए स्पष्ट नियम बनाए थे। जिसे उन्होने अपनी पुस्तक कौटिल्य के अर्थशास्त्र में विस्तार से वर्णन किया था। इस पुस्तक में उन्होंने संस्कृत के श्लोक के द्वारा जीवन के बहुत से जटिल विषयों के समाधान पर प्रकाश डाला था।  चाणक्य की मृत्यु 283 ईसा पूर्व में पटना में हुई थी। 

स्वामी विवेकानंद( निबंध) Swami Vivekaand

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  स्वामी विवेकानंद जी अपनी आध्यात्मिक विलक्षणता प्रतिभा और अपने व्याख्यान प्रस्तुति के लिए जगत प्रसिद्ध है।  स्वामी विवेकानंद जी के गुरु का नाम स्वामी रामकृष्ण परमहंस था । गुरु जी के आशीर्वचनों को परम आदेश मानते थे । वे सदैव उनके बताए पथ पर अग्रसर हुए और उन्होंने देश के साथ ही विदेशो भी सफलता सम्मान और प्रसिद्धि अर्जित किया । स्वामी विवेकानंद जी का पूरा नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके जन्मदिन की राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। वह युवा वर्ग के विशेष प्रेरणा स्रोत थे।  स्वामी विवेकानंद जी के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। स्वामी विवेकानंद जी ने स्कोटिस कालेज विद्यासागर कॉलेज और प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त किया। स्वामी विवेकानंद जी के गुरु का नाम राम कृष्ण परमहंस था। स्वामी विवेकानंद जी ने रामकृष्ण आश्रम और अद्वैत आश्रम की स्थापना किया था। वह प्रकांड विद्वान और आध्यात्मिक गुरु थे। स्वामी विवेकानंद जी ने कई किताबे भी लिखी थी। राजयोग  कर्मयोग  एवम् वर्तमान भारत उ...

चद्रशेखर आजाद (जीवन परिचय) Chandra Shekhar Azad A great revolutionary and great patriot

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  चंद्रशेखर आजाद महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया । उनका जन्म 23 जुलाई 1906 को अलीराजपुर के चंद्रशेखर आजाद नगर में हुआ था। चंद्रशेखर आजाद जी के पिता जी का नाम सीताराम तिवारी और माता जी का नाम जगराती देवी था। उन्होंने निशाने बाजी बचपन से ही अपने दोस्तो के साथ धनुष बाण चलाकर सीखा और अपने दोस्तो को सिखाया था। चंद्रशेखर आज़ाद जी अमृतसर के जलियांवाला बाग कांड से बहुत दुखी हुए और स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने का संकल्प लिया । उन्होंने महात्मा गांधी जी के द्वारा 1920 में चलाए गए असहयोग आन्दोलन से अपना क्रांतिकारी कदम उठाना प्रारम्भ कर दिया। अपने साथियों राम प्रसाद बिस्मिल सरदार भगत सिंह आदि के साथ योजनाएं बनाकर अंग्रेज़ो के हौसले को पस्त कर दिए  । उन्होंने अंग्रेज़ अधिकारियों की नीद चैन छीन लिया था  । अंग्रेज़ सरकार लगभग एक हजार सिपाहियों एवम् अधिकारियों को चंद्रशेखर आजाद की गिरफ्तारी के लिए लगाया था । चंद्रशेखर आजाद जी एक बार अपने कुछ साथियों को छुड़वाने के लिए दबाव बनाने के लिए जवाहर लाल नेहरू जी से मिलने इल...

वीर सावरकर (निबंध) Veer Savarkar

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  वीर सावरकर एक महान देशभक्त तथा क्रांतिकारी थे । उनके जैसे वीर जवानों के बल पर ही आज हमारा देश स्वतंत्र है । उन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में सक्रिय हो कर आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाने में मदद किया।  वीर सावरकर जी का पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था।  वीर सावरकर जी का जन्म 28 मई 1883 को  भारत देश के महाराष्ट्र राज्य के नासिक शहर के भागुर नमक स्थान पर हुआ था। वीर सावरकर जी के पिता जी का नाम दामोदर पंत सावरकर और माता जी का नाम राधा बाईं था। उनकी अर्धांगिनी अर्थात पत्नी यानी जीवन संगिनी का नाम यमुनाबाई सावरकर था। वीर सावरकर जी ने अपनी माध्यमिक स्तर की शिक्षा नासिक के शिवाजी स्कूल से 1901 में उत्तीर्ण किया था। उच्च स्तर की शिक्षा के लिए वह पुणे गए और वहां से स्नातक की उपाधि प्राप्त किया। वीर सावरकर जी सेनानी और सुधारक होने के साथ ही हिन्दू राष्ट्रवाद के मुखर विचारक और प्रवक्ता थे। वीर  सावरकर जी लाला लाजपत राय जी के साथ हिन्दू महासभा का कार्य भी किया। वह हिन्दू समाज के अग्रणी नेताओ ने से थे। वीर सावरकर जी ने 1907 में इंडिया हाउस लदंन में अपने भाषण में तर्क और तथ...

सरदार भगत सिंह (निबंध) Sardar Bhagat Singh

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  सरदार भगत सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना बहुमूल्य तथा उल्लेखनीय योगदान दिया है। देश की आजादी में उनका योगदान अनुकरणीय उदाहरण है। ऐसे वीर सपूतों के कारण ही  देश की आजादी सुरक्षित रहती है।  सरदार भगत सिंह जी को शहीद ए आजम के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 28 सितम्बर 1907 को पाकिस्तान देश के बंगा नमक स्थान पर हुआ था। सरदार भगत सिंह जी के पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम  विद्यावती था। सरदार भगत सिंह जी को अनेक भाषाओं की जानकारी थी । वह हिन्दी अंग्रेज़ी के साथ साथ उर्दू पंजाबी और बांग्ला के भी जानकार थे। सरदार भगत सिंह जी 1922 के चौरी चौरा काकोरी हत्या काण्ड से दुःखी और असहनीय वेदना से पीड़ित होकर  स्वतंत्रता आन्दोलन में देश के लिए अपने आप को समर्पित करने का फैसला लिया। राम प्रसाद बिस्मिल जी के फांसी ने भी उन्हें झकझोर कर रख दिया। इसके बाद जगत सिंह जी चंद्रशेखर आजाद और बटुकेश्वर दत्त  के संगति में आए। सरदार भगत सिंह जी राजगुरु और सुखदेव जी के साथ असेम्बली में बम फेक दिए और भागे नहीं । सरदार भगत सिंह जी की मृत्यु 23 मार्च 1931 हुई। भारत माता ...

राम प्रसाद बिस्मिल (जीवन परिचय)

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  राम प्रसाद बिस्मिल की का जन्म 11 जून 1897 को भारत देश के उत्तरप्रदेश राज्य के शाहजहांपुर में हुआ था। उनके पिता जी का नाम मुरलीधर और माता जी का नाम मूलमती था। राम प्रसाद बिस्मिल जी महान देशभक्त साहसी एवम् पराक्रमी क्रांतिकारी होने के साथ साथ कवि और साहित्यकार भी थे।  वह सामान्य शिक्षा प्राप्त क्रांतिकारी थे । वह अपने ज्ञान को बढाने के लिए अंग्रेजी का अध्यन करने के साथ साथ पुरोहित का कार्य भी किए ।उन्होंने अपने स्वाध्याय के द्वारा ही दयानन्द सरस्वती जी द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश का भी गंभीरता से अध्धयन किया तथा अनुभव अभ्यास और बुद्धि विवेक का प्रयोग करके अनेक कविताएं और पुस्तके भी  लिखा  जिन्दगी का राज बिस्मिल का तप सरफरोशी की तमन्ना स्वदेशी रंग तपोनिष्ठ आदि उनके द्वारा लिखित कविताएं है। अपनी आत्मकथा भी उन्होंने लिखा है। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के दौरान 9 अगस्त 1925 को काकोरी ग्राम लखनाऊ में राम प्रसाद बिस्मिल जी ने अपने अन्य साथियों के साथ रेल गाड़ी में डकैती डाल दिया। जिसके फलस्वरूप अंग्रेज़ हुकूमत ने उन्हें फांसी की सजा दिया। राम प्रसाद बिस्मिल जी को ...

लक्ष्मी बाई , झांसी की रानी ( ,जीवन परिचय) Rani Lakshmibai

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  रानी लक्ष्मीबाई को बचपन से मनु नाम से पुकारते थे। शादी के बाद लोग उन्हें रानी लक्ष्मीबाई नाम से संबोधित करने लगे। रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था।  उनके पिता का नाम मोरोपंत और माता का नाम भागीरथी था । उनकी शादी गंगाधर राव  जी से हुई थी। बचपन में ही मां की मृत्यु हो जाने के कारण वह अपने पिता के साथ उनके कार्य स्थल पर जाता थी।  उनके पिता मोरोपंत जी पेशवा बाजीराव द्वितीय के यहां कार्य करते थे। सन् 1842 में उनकी शादी गंगाधर राव से हुई । तत्पश्चात 1851 में उन्होंने एक अल्पायु पुत्र को जन्म दिया । जिसकी कुछ महीने बाद मृत्यु हो गई। सन् 1853 में उनके पति गंगाधर राव भी उनका साथ छोड़ चल बसे ।  उन्होंने शासन व्यवस्था पर नियंत्रण बनाए रखने का निर्णय लिया किन्तु ब्रितानी साम्राज्य और उनके पड़ोसी राज्यों के छल कपट से स्थिति नियंत्रण 8 बाहर हो गई । अंततः उन्हें युद्ध का सामना करना पड़ा ।  सन् 1857 में युद्ध का शंखनाद हो गया । जिसका वर्णन इतिहास करो ने किया है। समर भूमि में रानी लक्ष्मीबाई ने अदम्य अद्वितीय आश्याजनक कला कौशल के द्वारा अपने दुश...

भगवान कृष्ण (निबंध) Lord Krishna

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  भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादो मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को हुआ था। वह हिन्दू धर्म के चौबीस अवतारों में से एक है। कृष्ण जी का अवतार अर्थात प्रकटीकरण दिवस हिन्दी कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष के अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। उनका जन्म मथुरा की जेल में हुआ था। उनके पिता का नाम वसुदेव और माता का नाम देवकी था।  उनकी पत्नी का नाम रुक्मणि और पुत्र का नाम प्रदुम्न था। वह अपनी शिक्षा दीक्षा के लिए अपने गुरु संदीपनी मुनि के यहां उज्जैन गए । वहां उन्होंने अनेकों प्रकार की विद्या ज्ञान कला कौशल की पर्याप्त शिक्षा अर्जित किया । भगवान श्री कृष्ण जी ने धर्म के स्थापना और उत्थान का कार्य किया। साधु संत देवता के हित का काम किया ।  उन्होंने समाज के सभी वर्ग के लोगों का भला किया । वे पशु पक्षियों से भी अनन्य लगाव रखते थे।  भगवान श्री कृष्ण मोर का पंख अपने मस्तक पर धारण करते थे। वे गाय के  परम भक्त और सेवक थे। वे गायो को खिलाते और चराते थे।  कृष्ण जी समाज सेवा करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे । छोटा से छोटा सेवा का मौका भी नहीं चूकते थे । उनको लोग कन्हैया कान्हा ग...

मर्यादा पुरुषोत्तम राम (निबंध) Lord Ram Bhagwan Ramchandra

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  भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम रामचन्द्र जी हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता है। उनका अवतार अर्थात प्रकटीकरण हिन्दी कैलेंडर के चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को हुआ था । रामचन्द्र जी के पिता का नाम राजा दशरथ था । वह अयोध्या के राजा थे । उनके माता जी का नाम कौशल्या थी । माता कौशल्या राजा दशरथ की तीन रानियो में प्रथम रानी थी। रामचन्द्र जी की अपनी तीनों मताओ से कुल चार भाई थे । राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न । रामचन्द्र जी जब किशोरावस्था में थे । उसी दौरान एक दिन महा ऋषि विश्वामित्र अयोध्या आए और उन्होंने राजा दशरथ से अपने यज्ञ की राक्षसों से रक्षा हेतु राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने की इच्छा जताई। राजा दशरथ ने  विश्वामित्र जी को अपने पुत्रों को धर्म की स्थापना के लिए सहर्ष समर्पित करते हुए उन दोनों को उनके साथ भेज दिया । वह राम और लक्ष्मण जी ने राक्षसों का वध किया और यज्ञ को संपन्न कराया। राजा जनक जी के यहां से सीता स्वयंवर का निमंत्रण प्राप्त होने पर विश्वामित्र जी दोनों भाईयो को लेकर जनकपुर गए । वहां राम जी ने धनुष तोड़ दिया फलस्वरूप सीता जी से उनका विवाह हुआ ।  शादी विवाह ...