मर्यादा पुरुषोत्तम राम (निबंध) Lord Ram Bhagwan Ramchandra
भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम रामचन्द्र जी हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता है। उनका अवतार अर्थात प्रकटीकरण हिन्दी कैलेंडर के चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को हुआ था । रामचन्द्र जी के पिता का नाम राजा दशरथ था । वह अयोध्या के राजा थे । उनके माता जी का नाम कौशल्या थी । माता कौशल्या राजा दशरथ की तीन रानियो में प्रथम रानी थी। रामचन्द्र जी की अपनी तीनों मताओ से कुल चार भाई थे । राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न ।
रामचन्द्र जी जब किशोरावस्था में थे । उसी दौरान एक दिन महा ऋषि विश्वामित्र अयोध्या आए और उन्होंने राजा दशरथ से अपने यज्ञ की राक्षसों से रक्षा हेतु राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने की इच्छा जताई।
राजा दशरथ ने विश्वामित्र जी को अपने पुत्रों को धर्म की स्थापना के लिए सहर्ष समर्पित करते हुए उन दोनों को उनके साथ भेज दिया । वह राम और लक्ष्मण जी ने राक्षसों का वध किया और यज्ञ को संपन्न कराया।
राजा जनक जी के यहां से सीता स्वयंवर का निमंत्रण प्राप्त होने पर विश्वामित्र जी दोनों भाईयो को लेकर जनकपुर गए । वहां राम जी ने धनुष तोड़ दिया फलस्वरूप सीता जी से उनका विवाह हुआ ।
शादी विवाह बारात आदि संपन्न होने के पश्चात एक दिन राजा दशरथ की तीसरी रानी कैकेई ने पूर्व में दिए वचन के कारण एक वर मांगा जिसके अनुसार रामचन्द्र जी चौदह वर्ष के लिए अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन को चले गए।
वन में निवास करते हुए उन्होंने अनेक कष्ट उठाए और आज्ञाकारी पुत्र होने की मिशाल कायम किया।
वन में निवास करते समय उनका विवाद लंका के राजा राक्षस राज रावण से हो गया जो भयानक युद्ध में परिवर्तित हो गया।
अंततः अपने बल बुद्धि कौशल जप तप पुण्य प्रताप से उन्होंने राक्षस रावण का वध कर दिया। इसके उपरान्त लंका का राज्य रावण के भाई विभीषण को देकर लंका का राजा घोषित कर दिया। तत्पश्चात चौदह वर्ष की अवधि पूरी होने पर वह अयोध्या वापस लौट आए ।
अयोध्या वापस आने पर उनका भव्य कार्यक्रम में स्वागत किया गया। कुछ दिनों के पश्चात वह अयोध्या के राजा बन कर न्याय और धर्म के साथ आदर्श आचरण के साथ प्रजा की सेवा में समर्पित हो गए।

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