नारी या स्त्री (निबंध) Woman
नारी इस संसार में त्याग और तपस्या की साक्षात मूर्ति है । परिवार समाज शहर और राष्ट्र प्रत्येक स्तर पर इनकी अमिट छाप है । इनके कृत्य समाज को दिशा देते हैं । परिणास्वरूप समाज और संस्कृति के मूल स्वरूप का निर्माण होता है । यही देश की पहचान और संस्कृति का आधार होती है।
सांस्कृतिक इतिहास यह बताता है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर नारी का प्रभाव निश्चित रूप से होता है। नारी प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में विभिन्न रिश्तों में विद्यमान है।
सर्वप्रथम नारी मां के रूप में प्रत्येक व्यक्ति अथवा प्राणी को अपना सहयोग प्रदान करती है। सभी प्रकार के कष्ट तथा दुःख दर्द सहते हुए संतान की प्रगति प्राप्ति में अपना अतुलनीय योगदान देती है।
परिवार में अन्य रिश्तों में भी नारी विद्यमान है । बहन बुआ बेटी मौसी चाची नानी आदि रिश्तों में भी नारी मनुष्य की उन्नति में सहायक बनती है।प्रत्येक रिश्ते अपना अपना महत्व रखते हैं। किसी रिश्ते से कोई सहयोग होता है तो दूसरे से कोई और सबका अपनी पहचान है।
पत्नी के रूप में नारी अपनी प्रमुख भूमिका में होती है । यह पत्नी भी मां की ऋणी होती है। क्योंकि पति और पत्नी दोनों मां के योगदान को झुठला नहीं सकते ।
अतएव यही कहना उचित है :
नारी का सम्मान करो
अपना पूरा काम करो।
नारी का अपमान करो
अपना जीवन नष्ट करो।
जो न करे नारी सम्मान
संवेदना हीन शव समान।

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