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श्री राम शर्मा या आचार्य श्री राम शर्मा (निबंध) Shree Ram Sharma Gayatri Pariwar

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  श्री राम शर्मा  जी को आचार्य श्री राम शर्माके नाम से भी जानते है। उनका जन्म 20सितम्बर 1911 को भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा जनपद के आंवल खेड़ा नामक स्थान पर हुआ था। श्री राम शर्मा जी के पिता जी का नाम रूप किशोर शर्मा था। उनके माता जी का नाम राम कुवरि था। उनके पत्नी का नाम भगवती देवी शर्मा था। श्री राम शर्मा जी प्रकांड विद्वान आधात्मिक गुरु दार्शनिक और महान लेखक थे। उन्होंने लगभग चार हजार पुस्तके लिखी थी। वह एक अद्वितीय भास्यकार अर्थात टीकाकार भी थे। उन्होंने लगभग सभी वेद पुराण शास्त्र उपनिषद और स्मृतियों का अर्थ लिखा है। उन्होंने विचार क्रांति गायत्री और यज्ञ तथा युग निर्माण आदि हजारों पुस्तके और धर्मग्रंथ लिखे है। श्री राम शर्मा जी अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक थे। इसका प्रधान अर्थात मुख्य कार्यालय शांतिकुंज हरिद्वार में है। वे गायत्री माता के परम विद्वान भक्त थे। वह एक हिन्दू धर्म गुरु की तरह हिन्दुओं को जागरूक करके उनको सन्मार्ग पर अग्रसर करने का कार्य किए। श्रद्धेय परम सम्मान प्राप्त श्री राम शर्मा जी की मृत्यु 2जून 1990 को हरिद्वार में हुई।

तिरंगा (निबंध), Tricolor Tiranga

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  भारतवर्ष में हम सब तिरंगा शब्द सुनते हैं तो मात्र राष्ट्र ध्वज का विचार हृदय में प्रस्फुटित होता है। हमारा राष्ट्रीय झण्डा तीन रंगों का है अतः हम सभी इसे तिरंगे के नाम से पुकारते हैं। सबसे ऊपर केसरिया बीच में सफेद आौर नीचे हरा रंग होता है।  यह झण्डा 3:2 अर्थात 3 लंबाई और 2 चौड़ाई का होता है ।इसके बीच की सफेद पट्टी में नीले रंग का एक चक्र होता है जिसमें 24 तीलिया होती है । यह चक्र महान सम्राट अशोक के सारनाथ स्तंभ से लिया गया है । तीन रंगों की पट्टियों से बने इस झण्डे को तिरंगा अथवा भारत देश के राष्ट्र ध्वज के नाम से जानते हैं।  राष्ट्रीय पर्व या त्यौहारों पर तिरंगे को सभी स्कूलों एवं सरकारी कार्यालयों के साथ ही बड़े प्रतिष्ठानों पर फहराया जाता है। राष्ट्रगान गाया जाता है । अपने देश के आजादी के शहीदों को याद किया जाता है । उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के साथ ही विचार व्यक्त किया जाता है। राष्ट्रीय शोक की स्थिति में राष्ट्रीय ध्वज को झुका दिया जाता है अर्थात ऊपर से थोड़ा नीचे कर दिया जाता है  और अपना शोक प्रदर्शित किया जाता है। यह झण्डा हमें गर्व की अनुभूति करा...

नारी या स्त्री (निबंध) Woman

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  नारी इस संसार में त्याग और तपस्या की साक्षात मूर्ति है । परिवार समाज शहर और राष्ट्र प्रत्येक स्तर पर इनकी अमिट छाप है । इनके कृत्य समाज को दिशा देते हैं । परिणास्वरूप समाज और संस्कृति के मूल स्वरूप का निर्माण होता है । यही  देश की पहचान और संस्कृति का आधार होती है।  सांस्कृतिक इतिहास यह बताता है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर नारी का प्रभाव निश्चित रूप से होता है। नारी प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में विभिन्न रिश्तों में विद्यमान है।  सर्वप्रथम नारी मां के रूप में प्रत्येक व्यक्ति अथवा प्राणी को अपना सहयोग प्रदान करती है।   सभी प्रकार के कष्ट तथा दुःख दर्द सहते हुए संतान की प्रगति प्राप्ति में अपना अतुलनीय योगदान देती है। परिवार में अन्य रिश्तों में भी नारी विद्यमान है । बहन बुआ बेटी मौसी चाची नानी आदि रिश्तों में भी नारी मनुष्य की उन्नति में सहायक बनती है।प्रत्येक रिश्ते अपना अपना महत्व रखते हैं। किसी रिश्ते से कोई सहयोग होता है तो दूसरे से कोई और सबका अपनी पहचान है। पत्नी के रूप में नारी अपनी प्रमुख भूमिका में होती है । यह पत्नी भी मां की ऋणी होती है। क्...

लड़की (निबंध) ,Girl

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  आज के दौर में लड़की जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपना योगदान दे रही है। संसार के प्रत्येक देश में यह महसूस किया जा रहा है कि चाहे वह शिक्षा स्वास्थ्य चिकित्सा इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी का क्षेत्र हो सभी क्षेत्रों में लड़कियां अपना अतुलनीय योगदान दे रही है। समाज कल्याण के क्षेत्र में भी उनका सहयोग नजर अंदाज नहीं किया जा सकता । समन्वय और सामयिक समायोजन तो एक प्रकार से उन्ही के द्वारा आविष्कार किया गया तरीका है जिसे हम आप सभी अपनाते हैं।समाज किसी भी तरह से उनके सहयोग को छोटा नहीं समझ सकता। समाज और संस्कृति इस संसार में अपना महत्व पूर्ण स्थान रखती है। इस विषय में भी लड़कियों का योगदान उल्लेखनीय है । संस्कृति की पहचान तो उन्हीं के क्रियकलापों में स्पष्ट रूप से झलकती है। उनके कृत्य हमेशा अग्रणी भूमिका का निर्वाह करते है।चाहे वह कोई भी परम्परा और संस्कार हो  सभी में उनका सम्मानित स्थान है।  परिवार और कुटुम्ब के स्तर पर भी यदि नजर डाली जाए तो हम यही रुझान देखते है । यहां भी वह अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करती है साथ ही निर्वाह भी करती हैं।  सभी समीक्षाएं करने के बाद हम इस न...

मथुरा ( निबंध) Mathura

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  मथुरा हिन्दू धर्म का  प्राचीन नगर है । यह भारत देश के उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला है । जिसका अत्यधिक धार्मिक महत्व है । यह यमुना नदी के किनारे पर बसा है ।  भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म मथुरा में हुआ था । उनके पिता वासुदेव और माता देवकी जेल में बंद थे । कारागार में ही उनका जन्म हुआ था। जन्म के पश्चात उनके पिता ने देखा कि सारे सुरक्षा बल के जवान सो गए हैं तो उन्होंने कृष्ण जी को सुरक्षित पालन पोषण के लिए नन्द जी के घर पहुंचा दिया ।  मथुरा में आज भी हजारों मंदिर है । हिंदू धर्म के अनुयायियों के अत्यधिक आवागमन के कारण यहां प्रत्येक दिन मेला जैसा वातावरण रहता है । यहां आवागमन के तीनों प्रकार सड़क रेल तथा वायु मार्ग के साधन उपलब्ध रहते हैं ।  धार्मिक भावनाओं से सराबोर भक्त लोगो को यहां गली गली सहजता से  देखा  जा सकता है। लोग अपनी व्यवस्था एवम् सामर्थ्य के अनुसार सुविधाजनक तरीके से पूजा प्रार्थना करते है ।  मथुरा का मुख्य मंदिर कृष्ण जन्म भूमि है । प्रतिदिन यहां लाखो लोग दर्शन पूजन अर्चन एवम् वंदन के लिए आते हैं । यद्यपि यहां एक से बढ़कर एक आकर्षक और ...

वाराणसी (निबंध) Varanasi or Kashi

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  वाराणसी का प्राचीन नाम काशी है । ऐसी मान्यता है कि यह विश्व का प्राचीनतम शहर है । यह भी कहा जाता है कि यह त्रिशूल पर स्थित है। यह संसार की आध्यात्मिक राजधानी अर्थात केंद्र बिंदु माना जाता है। यह गंगा नदी के किनारे बसा है । हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से मुख्य विश्वनाथ जी का मंदिर यहां पर स्थित है । यह गंगा नदी के दशाश्वमेध घाट के पास है । सुबह चार बजे से ही साधु संत श्रद्धालु तथा पुजारी लोग पूजा अर्चना में लीन हो जाते हैं।  वाराणसी में गंगा नदी के किनारे इसकी प्राचीन धरोहर और विरासत के भव्य आकर्षण है। यह नजारा यह दर्शाता है कि इस शहर का प्राचीन इतिहास अत्यधिक गौरवशाली एवम् वैभव संपन्न था ।  लगभग सभी आध्यात्मिक संस्थाओं की शाखाएं एवम् कार्यालय यहां निर्मित किए गए हैं। विभिन्न संत जैसे  कबीर रविदास तुलसीदास आदि के भी मंदिर एवम् कार्यालय यहां पर स्थित है  काशी विश्वनाथ मंदिर संकट मोचन मंदिर तुलसी मानस मंदिर रत्नेश्वर महादेव मंदिर दुर्गाकुंड आदि यहां के प्रमुख आकर्षण है। हजारों की संख्या में यहां मंदिर है  गंगा नदी के किनारे ल...

अयोध्या (निबंध) Ayodhya

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  मंदिरों की नगरी अयोध्या हिन्दू धर्म का अत्यन्त पवित्र पुण्य क्षेत्र माना जाता है । धर्म ग्रंथो के अनुसार उच्च कोटि के तीर्थो में से एक अयोध्या भी है । इस स्थान पर लगभग  7500 मंदिर है । इसके उत्तर और पश्चिम दिशा में सरयू नदी बहती है ।  पुराणों के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ के तीन रानियो से चार पुत्र थे । माता कौशल्या कैकेई तथा सुमित्रा उनके नाम थे । पुत्रो के नाम राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न था । चारो पुत्रो में सबसे बड़े रामचन्द्र जी थे । वह मृदु भाषी विनम्र साहसी बलवान धैर्यवान एवम् आदर्श आचरण की प्रतिमूर्ति थे ।  अयोध्या के भव्य मन्दिरो में प्रत्येक दिन धार्मिक आयोजन होते रहते है । वहा के मंदिरों लाखो साधु संत एवम् श्रद्धालु हमेशा भजन करते रहते हैं । वहा के मंदिरों से हमेशा भजन की ध्वनि हृदय को मंत्र मुग्ध कर लेती है ।  सबको अपना दुःख दर्द कष्ट भूल जाता है । संतो के आशीर्वचनों से मन प्रसन्न आह्लादित आकर्षित एवम् भाव विभोर हो जाता है । अदृश्य  शक्तियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता तथा जिम्मेदारियों का बोध हो जाता है ।  सड़कों पर विभिन्न जिलों और राज्यो...